सोमवार, 16 सितंबर 2019

अभियंता दिवस

ब्रिटेन में एक ट्रेन द्रुत गति से दौड़ रही थी। ट्रेन अंग्रेजों से भरी हुई थी। उसी ट्रेन के एक डिब्बे में अंग्रेजों के साथ एक भारतीय भी बैठा हुआ था।

डिब्बा अंग्रेजों से खचाखच भरा हुआ था। वे सभी उस भारतीय का मजाक उड़ाते जा रहे थे। कोई कह रहा था, देखो कौन नमूना ट्रेन में बैठ गया। तो कोई उनकी वेश-भूषा देखकर उन्हें गंवार कहकर हँस रहा था। कोई तो इतने गुस्से में था, की ट्रेन को कोसकर चिल्ला रहा था, एक भारतीय को ट्रेन मे चढ़ने क्यों दिया ? इसे डिब्बे से उतारो।

किँतु उस धोती-कुर्ता, काला कोट एवं सिर पर पगड़ी पहने शख्स पर इसका कोई प्रभाव नही पड़ा। वह शांत गम्भीर बैठा था, मानो किसी उधेड़-बुन मे लगा हो।

ट्रेन द्रुत गति से दौड़े जा रही थी औऱ अंग्रेजों का उस भारतीय का उपहास, अपमान भी उसी गति से जारी था। किन्तु यकायक वह शख्स सीट से उठा और जोर से चिल्लाया "ट्रेन रोको"। कोई कुछ समझ पाता उसके पूर्व ही उसने ट्रेन की जंजीर खींच दी। ट्रेन रुक गईं।

अब तो जैसे अंग्रेजों का गुस्सा फूट पड़ा। सब उसको गालियां दे रहे थे। गंवार, जाहिल जितने भी शब्द शब्दकोश मे थे, बौछार कर रहे थे। किंतु वह शख्स गम्भीर मुद्रा में शांत खड़ा था। मानो उसपर किसी की बात का कोई असर न पड़ रहा हो। उसकी चुप्पी अंग्रेजों का गुस्सा और बढा रही थी।

ट्रेन का गार्ड दौड़ा-दौड़ा आया। कड़क आवाज में पूछा:- "किसने ट्रेन रोकी"..
कोई अंग्रेज बोलता उसके पहले ही, वह शख्स बोल उठा:- "मैंने रोकी श्रीमान"..
पागल हो क्या ? पहली बार ट्रेन में बैठे हो ? तुम्हें पता है, बिना कारण ट्रेन रोकना अपराध हैं:- "गार्ड गुस्से में बोला"
हाँ श्रीमान ज्ञात है किंतु मैं ट्रेन न रोकता तो सैकड़ो लोगो की जान चली जाती।

उस शख्स की बात सुनकर सब जोर-जोर से हंसने लगे। किँतु उसने बिना विचलित हुये, पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा:- करीब एक फरलाँग(220 गज)  की दूरी पर पटरी टूटी हुई हैं। आप चाहे तो चलकर देख सकते है।

गार्ड के साथ वह शख्स और कुछ अंग्रेज सवारी भी साथ चल दी। रास्ते भर भी अंग्रेज उस पर फब्तियां कसने मे कोई कोर-कसर नही रख रहे थे।
किँतु सबकी आँखें उस वक्त फ़टी की फटी रह गई जब वाक़ई , बताई गई दूरी के आस-पास पटरी टूटी हुई थी। नट-बोल्ट खुले हुए थे। अब गार्ड सहित वे सभी चेहरे जो उस भारतीय को गंवार, जाहिल, पागल कह रहे थे। वे सभी उसकी और कौतूहलवश देखने लगे। मानो पूछ रहे हो आपको ये सब इतनी दूरी से कैसे पता चला ??..

गार्ड ने पूछा:- तुम्हें कैसे पता चला , पटरी टूटी हुई हैं ??.
उसने कहा:- जब सभी लोग ट्रेन में अपने-अपने कार्यो मे व्यस्त थे। उस वक्त मेरा ध्यान ट्रेन की गति पर केंद्रित था। ट्रेन स्वाभाविक गति से चल रही थी। किन्तु अचानक पटरी की कम्पन से उसकी गति में परिवर्तन महसूस हुआ। ऐसा तब होता हैं, जब कुछ दूरी पर पटरी टूटी हुई हो। अतः मैंने बिना क्षण गंवाए, ट्रेन रोकने हेतु जंजीर खींच दी।

गार्ड औऱ वहाँ खड़े अंग्रेज दंग रह गये। गार्ड ने पूछा, इतना बारीक तकनीकी ज्ञान, आप कोई साधारण व्यक्ति नही लगते। अपना परिचय दीजिये।

शख्स ने बड़ी शालीनता से जवाब दिया:- मैं इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ...

जी हाँ वह असाधारण शक्श कोई और नही डॉ विश्वेश्वरैया थे। जो देश के "प्रथम इंजीनियर" थे। आज उनका जन्मदिवस हैं। उनके जन्मदिवस को अभियंता दिवस(इंजीनियर डे) के रूप मे मनाया जाता हैं। देशभर के इंजीनियर इसे धूमधाम से मनाते हैं।


एक राजा के पास कई हाथी थे। उनमें से एक हाथी बहुत शक्तिशाली था, बहुत आज्ञाकारी, समझदार व युद्ध-कौशल में निपुण था। बहुत से युद्धों में वह भेजा गया था और वह राजा को विजय दिलाकर वापस लौटा था। इसलिए वह महाराज का सबसे प्रिय हाथी था।

समय गुजरता गया और एक समय ऐसा भी आया, जब वह वृद्ध दिखने लगा। अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर पाता था। इसलिए अब राजा उसे युद्ध क्षेत्र में भी नहीं भेजते थे।

एक दिन वह सरोवर में जल पीने के लिए गया और वहीं कीचड़ में उसका पैर धँस गया और फिर धँसता ही चला गया।  उस हाथी ने बहुत कोशिश की, लेकिन वह उस कीचड़ से स्वयं को नहीं निकाल पाया। उसकी चिंघाड़ने की आवाज से लोगों को यह पता चल गया कि वह हाथी संकट में है। हाथी के फँसने का समाचार राजा तक भी पहुँचा। राजा समेत सभी लोग हाथी के आसपास इक्कठा हो गए और विभिन्न प्रकार के शारीरिक प्रयत्न उसे निकालने के लिए करने लगे। लेकिन बहुत देर तक प्रयास करने के उपरांत कोई मार्ग नही निकला।

तभी गौतम बुद्ध मार्गभ्रमण कर रहे थे. राजा और सारा मंत्रिमंडल तथागत गौतम बुद्ध के पास गये और अनुरोध किया कि आप हमे इस बिकट परिस्थिति मे मार्गदर्शन करें।  गौतम बुद्ध ने सबके साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया और फिर राजा को सुझाव दिया कि सरोवर के चारों और युद्ध के नगाड़े बजाए जायें। सुनने वालों को विचित्र लगा कि भला नगाड़े बजाने से वह फँसा हुआ हाथी बाहर कैसे निकलेगा ? जैसे ही युद्ध के नगाड़े बजने प्रारंभ हुए, वैसे ही उस मृतप्राय हाथी के हाव-भाव में परिवर्तन आने लगा।

पहले तो वह धीरे-धीरे करके खड़ा हुआ और फिर सबको हतप्रभ करते हुए स्वयं ही कीचड़ से बाहर निकल आया। गौतम बुद्ध ने सबको स्पष्ट किया कि हाथी की शारीरिक क्षमता में कमी नहीं थी, आवश्यकता मात्र उसके अंदर उत्साह के संचार करने की थी।

जीवन में उत्साह बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि मनुष्य सकारात्मक चिंतन बनाए रखे और निराशा को हावी न होने दे। कभी – कभी निरंतर मिलने वाली असफलताओं से व्यक्ति यह मान लेता है कि अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर सकता. लेकिन यह पूर्ण सत्य नहीं है।   सकारात्मक सोच ही आदमी को "आदमी" बनाती है, उसे अपनी मंजिल  तक ले जाती है।
आप हमेशा सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण, स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें।

गुरुवार, 9 अगस्त 2018

ओम नमः शिवाय आज शिवरात्रि के दिन भगवान शंकर का जल द्वारा दुग्ध द्वारा और गंगाजल द्वारा अभिषेक किया जाना चाहिए इससे अपने सारे कष्ट दूर होते हैं विशेषकर जो मन में संताप रहता है और आलस्य आया रहता है तथा काम ना करने का जो मन करता है और मन घबराता है यह सभी समस्याओं का निवारण होता है। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें शर्मा जी 9518 605 227
हे महादेव पुनः नील कंठ कहलाना है |

हे महादेव !
युग कल्मष तत्व से ग्रषित है,
सम्बन्ध समूचे स्वार्थ निहित हैं,
ताप-त्रय से विश्व आज दूषित है,
घोर अनाचार छा रहा,
आज तो अम्बर भी बादलों के नीचे आ रहा,
अहंकार-मद आज हाबी हो रहे,
अज्ञानता के सताए इंसान आज
धर्म के अर्थ की निज व्याख्या कर रहे,
सत्ता लोलुप जनहित छोड़ निज हित में खो रहे
मनुज मनुज के तन का भूखा है,
सत्य -तप- दया जीवन से अनदेखा है,
मनुष्य को मनुष्य बनाना है,
कलयुग की कलुषता का गरल
पुनः कंठ में बसाना है
हे महादेव पुनः नील कंठ कहलाना है |

मंगलवार, 3 मार्च 2015

आयुर्वेद उपचार

लाभकारी मुलैठी> प्राचीनकाल से लेकर अब तक मुलैठी को उन तमाम महत्वपूर्ण औषधियों में से एक गिना जाता है, जिसका उपयोग प्रायः मनुष्य के विभिन्न प्रकार के रोगों निदान हेतु अति आवश्यक समझा गया है। शायद यही एकमात्र वजह है कि स्वाद में मीठी जड़ों वाला मुलैठी रूपी अद्भुत औषधीय पौधा आज की तारीख में हरेक घर में अपनी एक खास पहचान बना चुका है। बात भारतीय चिकित्सा पध्दतियों की आती है तो इसका उल्लेख अथर्ववेद से लेकर चरक संहिता तथा अर्थशास्त्र ग्रंथों तक बखूबी दिखाई देता है। इतना ही नहीं, विदेशी चीनी चिकित्सा प्रणाली ने तो मुलैठी को अपनी चिकित्सा पध्दति में एक विशेष स्थान दिया है। बहरहाल, वर्तमान समय में अधिकांश घरेलू चिकित्सा कार्यों में नित अमल में आने वाली मुलैठी की जड़ों के कुछ मुख्य औषधीय गुण निम्न प्रकार से हैं। मांसपेशियों एवं जोड़ों के दर्द से राहत : देखने में आता है कि बड़े-बुजुर्गों को लेकर शरीर के जोड़ों में भयंकर दर्द की शिकायत रहती है। यदि आप चाहते हैं कि उनको इस दर्द से छुटकारा मिल जाये तो मुलैठी की जड़ों को पूरी रात पानी में भिगोकर रखने के उपरान्त उसके पानी का सेवन करने। यकीनन पुराने से पुराने जोड़ों एवं मांसपेशियों के दर्द से काफी हद तक राहत पायी जा सकती है। कब्ज की छुट्टी : यूं तो आये दिन किसी न किसी को पेट में कब्ज की शिकायत से दो-चार होनी ही पड़ता है।, लेकिन यदि आप मुलैठी के पाउडर को गुड़ और पानी के साथ लेते हैं तो निस्संदेह कब्ज रूपी इस गंभीर समस्या से छुट्टी मिल सकती है। घावों को जल्दी भरें : चिकित्सकों का मानना है कि मुलैठी के बारीक चूर्ण को मक्खन, घी अथवा शहद के संग मिलाकर घावों पर लेप लगाने से ये अतिशीघ्र ठीक हो जाते हैं और शरीर पर कोई काला निशान भी शेष नहीं रह जाता। मुंह के छाले मिटाएं : आयुर्वेद के मुताबिक मुलैठी का जड़ों की स्वच्छ जल में कुछ समय तक डुबोकर रखने के पश्चात् उस पानी से गरारे करने से मुंह में मौजूद छालों का नाश हो जाता है। बालों को झड़ने एवं टूटने से बचायें : महिलाओं और पुरुषों को सदैव अपने लम्बे-लम्बे केशों के झड़ने एवं टूटने की चिंता रहती है, लेकिन सही मायने में देखा जाये तो इस स्थिति में मुलैठी बालों के लिए बहुत प्रभावकारी होती है। सो, बालों को झड़ने एवं टूटने से रोकने के लिए मुलैठी की जड़ों को दूध में मिश्रित करके पीसकर थोड़ी मात्रा में केसर का समावेश कर पेस्ट तैयार लेने के बाद रात को सोने से पूर्व बालों की जड़ों में लगायें। निस्संदेह बालों के झड़ने एवं टूटने का समस्या से छुटकारा मिल जायेगा और बाल घने एवं मुलायम बन जायेंगे। इसके इलावा पेट के अलसर और अन्य व्याधियों में भी लाभदायक है बेशक आम आदमी इसको गले के कष्ट यांनी खांसी जुकाम में ही प्रयोग करते है।

बुधवार, 26 दिसंबर 2012

फिर से दुर्गा का यहाँ अवतार हो ।
फिर से दनुजों का यहाँ संहार हो ।
मातृशक्ति हस्त में फिर से यहाँ ,
चूड़ियों की जगह अब तलवार हो ।
लेखनी वह धन्य है जिसमें सदा ,
जागरण का आमरण हुँकार हो ।
माँ, बहन, बेटी भी होती नारियाँ ,
उनकी श्रद्धा, स्नेह का श्रृंगार हो ।
आत्मा क्यों मर रही इंसान की ,
सोचिये ,किस तरह का आचार हो ।
गंदे मन को साफ़ कर के प्रण करें ,
अब ना कोई दामिनी शिकार हो ।
फैसला ना दे सके संसद अगर ,
फैसला कर किसकी अब सरकार हो ।

बुधवार, 29 अगस्त 2012

हे महादेव पुनः नील कंठ कहलाना है |

हे महादेव !
युग कल्मष तत्व से ग्रषित है,
सम्बन्ध समूचे स्वार्थ निहित हैं,
ताप-त्रय से विश्व आज दूषित है,
घोर अनाचार छा रहा,
आज तो अम्बर भी बादलों के नीचे आ रहा,
अहंकार-मद आज हाबी हो रहे,
अज्ञानता के सताए इंसान आज
धर्म के अर्थ की निज व्याख्या कर रहे,
सत्ता लोलुप जनहित छोड़ निज हित में खो रहे
मनुज मनुज के तन का भूखा है,
सत्य -तप- दया जीवन से अनदेखा है,
मनुष्य को मनुष्य बनाना है,
कलयुग की कलुषता का गरल
पुनः कंठ में बसाना है
हे महादेव पुनः नील कंठ कहलाना है |